भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ा और गर्व भरा पल सामने आया है। पायल कपाड़िया को कान फिल्म फेस्टिवल के 65वें एडिशन में क्रिटिक्स वीक की जूरी अध्यक्ष बनाया गया है। इस खास जिम्मेदारी को संभालने वाली वह पहली भारतीय फिल्म निर्माता बन गई हैं। यह उपलब्धि न सिर्फ उनकेकरियर के लिए बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी पहचान मानी जा रही है।
पिछले साल अपनी फिल्म ऑल वी इमेजिन एज लाइट के लिए प्रतिष्ठित ‘ग्रैंड प्रिक्स’ जीतने के बाद पायल कपाड़िया ने दुनियाभर में अपनी खासपहचान बनाई थी। अब उसी मंच पर जूरी का नेतृत्व करना उनके सफर को एक नए मुकाम पर ले जाता है। इस अंतरराष्ट्रीय जूरी में थिओडोर पेलरीन, ओक्लू, अमा अम्पाडू और डॉनसरन कोविटवानिचा जैसे नाम भी शामिल हैं, जो दुनिया भर के उभरते टैलेंट को पहचानने का काम करेंगे।
क्रिटिक्स वीक, जो 13 से 21 मई तक आयोजित होगा, नए और अलग सिनेमा को मंच देने के लिए जाना जाता है। पायल कपाड़िया के काम कीखास बात उनकी कहानी कहने की शैली है, जिसमें कविता, राजनीति और समाज की सच्चाइयों का अनोखा मेल देखने को मिलता है। उनके सिनेमामें लोक कथाओं से लेकर वर्ग संघर्ष और महिलाओं की जिंदगी के कई अनदेखे पहलुओं को गहराई से दिखाया जाता है।
उनकी शॉर्ट फिल्में आफ्टरनून क्लाउड्स और एंड व्हाट इज द समर सेइंग अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराही जा चुकी हैं। वहीं उनकी डॉक्यूमेंट्री एनाइट ऑफ नोइंग नथिंग को कान में ‘ल'ओइल डी'ओर’ अवॉर्ड मिला था। उनकी फिल्म ऑल वी इमेजिन एज लाइट ने भी वैश्विक स्तर पर खूब तारीफबटोरी। अब जूरी अध्यक्ष के रूप में उनकी मौजूदगी यह साबित करती है कि भारतीय सिनेमा की आवाज दुनिया में और भी मजबूत होती जा रही है।